बुधवार, 12 जून 2013

एक दिन पूरी दुनिया कहेगी जो बात हिन्दी में है, वो किसी और में नहीं ।

हिन्दी भाषा 'इंडो यूरोपियन' परिवार से संबंध रखती है। - इस भाषा के उद्गम का महाद्वीप 'एशिया' व देश 'भारत' है। -
भारत देश में हिन्दी भाषा को अधिकृत रुप से उपयोग किया जाता है। - 366,000,000 लोगों के लिए यह भाषा 'मातृभाषा' है वहीं इस भाषा को कुल 487,000,000 लोग उपयोग करते हैं। - हिन्दी की वर्णमाला में 11 स्वर व 33 समस्वर हैं। - हिन्दी की देवनागरी लिपि को प्राचीन ब्राह्मी से लिया गया है - हिन्दी की ढेरों बोलियाँ है जिसमें निमाड़ी, बुंदेलखंडी, खड़ीबोली आदि शामिल है। - 80 हिन्दी स्कूल अमेरिका मे और 95 हिन्दी स्कूल कनाडा में हैं । - 24 विश्वविद्यालय मौरीशस में हैं । - लगभग ९५ हिन्दी शिक्षण संस्थायें औस्ट्रेलिया मे हैं । - वर्तमान में हिन्दी साउथ एशिया (भारत, पाकिस्तान, नेपाल व भूटान), साउथ अफ्रीका, मॉरीशस, यूएसए, कनाडा, फिजी, युगांडा, गुएना, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, न्यूजीलेंड, सिंगापुर जैसे देशों में भी व्यापक स्तर पर बोली जा रही है। आओ हम सब अपनी हिन्दी का मान बढायें । इस हिन्दी रूपी सूत्र में बंध कर एक हो जायें । और अपनी हिन्दी को विश्व मंच पर सम्मान दिलायें । आज सिर्फ हम कह रहे हैं, पर हम प्रयास करेंगे तो एक दिन पूरी दुनिया कहेगी जो बात हिन्दी में है, वो किसी और में नहीं । जय हिन्द ।
क्या आप जानते हैं -
-हिन्दी भाषा 'इंडो यूरोपियन' परिवार से संबंध रखती है।
- इस भाषा के उद्गम का महाद्वीप 'एशिया' व देश 'भारत' है।
- भारत देश में हिन्दी भाषा को अधिकृत रुप से उपयोग किया जाता है।
- 366,000,000 लोगों के लिए यह भाषा 'मातृभाषा' है वहीं इस भाषा को कुल 487,000,000 लोग उपयोग करते हैं।
- हिन्दी की वर्णमाला में 11 स्वर व 33 समस्वर हैं।
- हिन्दी की देवनागरी लिपि को प्राचीन ब्राह्मी से लिया गया है
- हिन्दी की ढेरों बोलियाँ है जिसमें निमाड़ी, बुंदेलखंडी, खड़ीबोली आदि शामिल है।
- 80 हिन्दी स्कूल अमेरिका मे और 95 हिन्दी स्कूल कनाडा में हैं ।
- 24 विश्वविद्यालय मौरीशस में हैं ।
- लगभग ९५ हिन्दी शिक्षण संस्थायें औस्ट्रेलिया मे हैं ।
- वर्तमान में हिन्दी साउथ एशिया (भारत, पाकिस्तान, नेपाल व भूटान), साउथ अफ्रीका, मॉरीशस, यूएसए, कनाडा, फिजी, युगांडा, गुएना, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, न्यूजीलेंड, सिंगापुर जैसे देशों में भी व्यापक स्तर पर बोली जा रही है।

आओ हम सब अपनी हिन्दी का मान बढायें ।
इस हिन्दी रूपी सूत्र में बंध कर एक हो जायें ।
और अपनी हिन्दी को विश्व मंच पर सम्मान दिलायें ।

आज सिर्फ हम कह रहे हैं, पर हम प्रयास करेंगे तो एक दिन पूरी दुनिया कहेगी जो बात हिन्दी में है, वो किसी और में नहीं ।

शनिवार, 8 जून 2013

मोदी कि ग्रह दशा और प्रधानमन्त्री का पद,,शुक्र, सूर्य एवं शनि ग्रहों के योगो मे कमी है फिर भी ग्रहो के खेल निराले है

मोदी कि ग्रह दशा और प्रधानमन्त्री का पद देश में अभी तक मंगल, शुक्र, सूर्य एवं शनि ग्रहों वाले व्यक्ति ही प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए हैं। 
इनमें से मंगल एवं शुक्र राशि का वर्चस्व प्रधानमंत्री के लिए अधिक रहा है। ग्रहों के मान से सन् 1947 से 2012 वर्तमान समय तक भारत में चैदह प्रधानमंत्री हुए है। इनमें ग्रहों का प्रभाव इस प्रकार रहा है। मंगल ग्रह -सर्वश्री लालबहादूर शास्त्री , चरणसिंह , चंद्रशेखर , अटलबिहारी वाजपेयी , (4) शुक्र ग्रह - श्रीमती इंदिरा गांधी , राजीव गंाधी , विश्वनाथप्रतापसिंह , इंद्रकुमार गुजराल (4) शनि ग्रह - श्री जवाहरलाल नेहरू, गुलजारीलाल नंदा (2) सूर्य ग्रह - श्री मोरारजी देसाई , मनमोहनसिंह (2) बुध ग्रह - पी.वी. नरसिंहराव
नरेन्द्र मोदी के शुक्र, सूर्य एवं शनि ग्रहों के योगो मे कमी है फिर भी ग्रहो के खेल निराले है


श्री मोदी को उस समय भाग्य भाव की राशि कर्क के स्वामी चंद्र में राहू में केतू की दशांतर रहेगी। तुला राशि में राहू और शनि द्वादश भाव में गोचर करेगें। द्वितीय एवं पंचम भाव की राशि का स्वामी गुरु मारक स्थान सप्तम भाव में, दशम भाव की राशि सिंह का स्वामी सूर्य अपनी राशि से षष्टम होकर तृतीय भाव में गोचर करेगा जो मोदी को प्रधान मंत्री बनने में बाधक बन सकते हैं। वर्तमान लोकसभा की नियत अवधि पूर्ण हो जाने पर नवंबर 2014 में चुनाव होने के समय भारत की कुंडली में सूर्य में शुक्र में सूर्य की दशांतर होगी। वहीं श्री मोदी के लिए चंद्र में गुरु में चंद्र अथवा मंगल का दशांतर गोचर में रहेगा। गोचर ग्रहों के मान से सूर्य शनि एवं शुक्र वृश्चिक में, गुरु कर्क में, मंगल धनु में व राहू कन्या में, रहेगें। श्री मोदी की कुंडली के मान से लग्न में दशम भाव का स्वामी सूर्य, तृतीय भाव एवं चतुर्थ भाव के स्वामी शनि एवं सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी शुक्र की युति रहेगी। लग्न तथा षष्टम भाव का स्वामी मंगल अपनी राशि से द्वितीय एवं नवम होकर द्वितीय भाव में गोचर। गुरु उच्च का होकर भाग्य भाव में होगा। उस वक्त श्री मोदी को लग्न, पंचम एवं भाग्य भाव की दंशातर रहेगी और भारत के मान से तृतीय भाव में कर्क राशि में गुरु की भाग्य भाव पर पूर्ण दृष्टि होगी। सूर्य, शनि, शुक्र की सप्तम भाव में युति होगी तथा उस समय भारत की सूर्य एवं शुक्र की दंशातर होगी।
मोदी के लिए बाधक ग्रह, भाग्य भाव की राशि कर्क का स्वामी चंद्रमा होता है जो लग्न में नीच का होकर मंगल के साथ है। मंगल एवं चंद्र की पूर्ण दृष्टि संगठन भाव सप्तम पर पूर्ण होने के कारण मोदी एवं संगठन के मध्य आपसी मतभेद उभर सकते है जिससे श्री मोदी को निपटना होगा। 
प० राजेश कुमार शर्मा भृगु ज्योतिष अनुसन्धान एवं शिक्षा केन्द्र सदर गजं बाजार मेरठ कैन्ट 09359109683

प्रेम विवाह, शीघ्र विवाह, प्रेम में सफलता के लिए भैरवी देवी साधना करनी चाहिए

सुंदर पति या पत्नी की प्राप्ति के लिए, प्रेम विवाह, शीघ्र विवाह, प्रेम में सफलता के लिए भैरवी देवी साधना करनी चाहिए।माता भैरवी साधना से जहां प्रेत बाधा से मुक्ति प्राप्ति होती है, वही शारीरिक दुर्बलता भी समाप्त होती है, असाध्य और दुष्कर से दुष्कर कार्य भी पूर्ण हो जाते है। 
मंत्र-ऊँ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहाः देवी धूमावती महाविद्या हर प्रकार की दरिद्रता के नाश के लिए, तंत्र-मंत्र के लिए, जादू-टोना, बुरी नजर और भूत-प्रेत आदि समस्त भयों से मुक्ति के लिए, सभी रोगों के लिए, अभय प्राप्ति के लिए, साधना में रक्षा के लिए, जीवन में आने वाले हर प्रकार के दुःखों का निदान करने वाली देवी है। 
आये दिन और नित्य प्रति ही यदि कोई रोग लगा रहता हो या शारीरिक अस्वस्थता निरंतर बनी ही रहती हो, तो वह भी दूर होने लग जाती है। उसकी आखों में प्रबल तेज व्याप्त हो जाता है,

जय जय भैरवी असुर-भयाउनी
पशुपति- भामिनी माया
सहज सुमति बर दिय हे गोसाउनी
अनुगति गति तुअ पाया। ।
बासर रैन सबासन सोभित
चरन चंद्रमनि चूडा।
कतओक दैत्य मारि मुँह मेलल,
कतौउ उगलि केलि कूडा । ।
सामर बरन, नयन अनुरंजित,
जलद जोग फुल कोका।
कट कट विकट ओठ पुट पाँडरि
लिधुर- फेन उठी फोका। ।
घन घन घनन घुघुरू कत बाजय,
हन हन कर तुअ काता।
विद्यापति कवि तुअ पद सेवक,
पुत्र बिसरू जुनि माता। ।
इन पंक्तियों में माँ के भैरवी रूप का वर्णन किया है।

बुधवार, 5 जून 2013

8 जून 2013 को देव पितृकार्य अमावस्या, बड़ पूजन अमावस्या, भावुका अमावस्या, शनि जयंती, संत झानेश्वर जयंती,


8  जून 2013 को देव पितृकार्य अमावस्या, बड़ पूजन अमावस्या, भावुका अमावस्या, शनि जयंती, संत झानेश्वर जयंती, रोहिणी व्रत ( जैन ), वट सावित्री व्रत है इस दिन के पंचाग निम्नवत है और अमावस्या के साथ जयंती भी है 
ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष, तिथि   अमावस्या  , वार   शनिवार  ,  विक्रम संवत् 2070
पराभव नाम संवत्सर , शक संवत् 1935 / सूर्य उत्तरायण , ग्रीष्म ऋतु,
अंग्रेजी दिनांक  --  8  जून मास , ईस्वी सन् 2013 पंचाग - तिथि-  अमावस्या रात्रि  9.27  तक, तदुपरान्त  प्रतिपदा 
नक्षत्र-   रोहिणी   रत्रि  8.10  तक, तदुपरान्त   मृगशिरा  /योग-   धृति    सायं  7.04  तक, तदुपरान्त   शूल 
ग्रहों का गोचर भ्रमण- सूर्य- वृष राशि मे /मंगल - वृष राशि मे / बुध- मिथुन राशि मे /गुरु- मिथुन राशि मे /शुक्र- मिथुनराशि मे /शनि-तुला राशि मे / राहु-तुला राशि मे/ केतु-मेष राशि मे /चंद्र- वृष राशि मे श्रेष्ठ चैघडि़ये - शुभ का 7.18 से 9.01 तक /चर, लाभ, अमृत का 12.25 से 5.32 तक / राहु काल वेला - दिन 9.00 से 10.30 तक  शनि अमावस्या शुभ हो
8-6-2013 को शनि अमावस्या है क्यों न शनिदेव से अपने बुरे कर्मों के लिए माफ़ी मांग लें शनि मंत्र व स्तोत्र सर्वबाधा निवारक वैदिक गायत्री मंत्र 'ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो शनि: प्रचोदयात्।' प्रतिदिन श्रध्दानुसार शनि गायत्री का जाप करने से घर में सदैव मंगलमय वातावरण बना रहता है। वैदिक शनि मंत्र ॐ शन्नोदेवीरमिष्टय आपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्रवन्तुन:। शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे पवित्र और अनुकूल मंत्र है इसकी दो माला सुबह शाम करने से शनिदेव की भक्ति व प्रीति मिलती है।
कष्ट निवारण शनि मंत्र नीलाम्बर: शूलधर: किरीटी गृघ्रस्थितस्त्रसकरो धनुष्मान्। चर्तुभुज: सूर्यसुत: प्रशान्त: सदाऽस्तुं मह्यं वरंदोऽल्पगामी॥ इस मंत्र से अनावश्यक समस्याओं से छुटकारा मिलता है। प्रतिदिन एक माला सुबह शाम करने से शत्रु चाह कर भी नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा। सुख-समृध्दि दायक शनि मंत्र कोणस्थ:पिंगलो वभ्रु: कृष्णौ रौद्रान्त को यम:। सौरि: शनैश्चरौ मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:॥ इस शनि स्तुति को प्रात:काल पाठ करने से शनिजनित कष्ट नहीं व्यापते और सारा दिन सुख पूर्वक बीतता है। 
शनि पत्नी नाम स्तुति ॐ शं शनैश्चराय नम: ध्वजनि धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया। कंटकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा॥ ॐ शं शनैश्चराय नम: यह बहुत ही अद्भुत और रहस्यमय स्तुति है यदि आपको कारोबारी, पारिवारिक या शारीरिक समस्या हो। इस मंत्र का विधिविधान से जाप और अनुष्ठान किया जाये तो कष्ट आपसे कोसों दूर रहेंगे।
प० राजेश कुमार शर्मा भृगु ज्योतिष अनुसन्धान एवं शिक्षा केन्द्र सदर गजं बाजार मेरठ कैन्ट 09359109683

मंगलवार, 4 जून 2013

भृगु ज्योतिष श्री यन्त्र ,व्यापरवृद्धि यन्त्र

भृगु ज्योतिष अनुसन्धान एवं शिक्षा केन्द्र द्वारा श्री यन्त्र ,व्यापरवृद्धि यन्त्र , सुखसमृद्धि यन्त्र, रोगनिवारन यन्त्र नजरसुरक्षा यन्त्र एवं सभी प्रकार के यन्त्र आपके नाम एवं गौत्र के उच्चारण्‍ा के साथ मंत्रो के उच्चारण्ण के साथ तैयार किये जाते है अगर आप इच्छूक है तो सम्पर्क कर सकते है। अगर आप चाहे तो फोन न० 9359109683 पर बात कर सकते है।!

आपकी समस्याओ का उचित समाधान

भृगु ज्योतिष अनुसन्धान एवं शिक्षा केन्द्र सदर गजं बाजार मेरठ कैन्ट में हमारे यहाँ ज्योतिष शास्त्र द्वारा आपकी समस्याओ का उचित समाधान अनुभवी सुयोग्य ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है एवं कमप्यूटराइज एवं हस्त लिखित जन्म पत्री भी तैयार कि जाती है 
अगर आप इच्छूक है तो सम्पर्क कर सकते है। अगर आप चाहे तो फोन न० 9359109683 पर बात कर सकते है।

शनिवार, 1 जून 2013

शनि का लाभ उठाये 9 जुलाई 2013 तक इस समय शनि वर्की है


शनि का लाभ उठाये 9 जुलाई 2013 तक इस समय शनि वर्की है
25 फरवरी 2013 की दोपहर से शनि वक्री हो गयें है और 9 जुलाई 2013 को सुबह के बाद फिर से मार्गी होगे। यहां वक्री होने का अर्थ है वर्तमान में अपनी शनि उलटी चाल से चलरहें है और मार्गी होने का अर्थ है सीधी चाल चलना। शनि ने वक्री होकर राशि नहीं बदली है। वह तुला राशि में ही है लेकिन चाल बदलने से कई राशियों पर इसका विपरित प्रभाव भी पड रहा है 9 जुलाई 2013 तक लगभग 135 दिनों तक शनि वक्री

शनि की यह उलटी चाल मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, कुंभ एवं मीन का विशेष असर डालेगी। इनमें से कर्क एवं मीन में शनि का ढय्या चल रहा है एवं कन्या, तुला एवं वृश्चिक मे साढ़ेसाती चल रही है। मिथुन एवं कुंभ राशि से ढय्या कुछ समय पूर्व ही समाप्त हुई है एवं  सिंह, से साढ़ेसाती उतरी थी लेकिन शनि के वक्री होने से एक बार फिर ये राशियां शनि के प्रभाव में आएंगी।
मेष- इस समय शनि की पूर्ण दृष्टि आपकी राशि पर बनी हुई है। वक्री होने के बाद भी आपको सावधानी पूर्वक कार्य करना चाहिए। किसी से व्यर्थ विवाद न करें, किसी को सताए नहीं। हनुमानजी का ध्यान और पूजन करें।
वृषभ- इस राशि के लोग वर्तमान में शनि के बुरे प्रभाव से आजाद हैं। आप अपने कार्यों को आगे बढाएं, लाभ प्राप्ति के योग बनेंगे। चिंता मुक्ति रहेंगे। लाभ होने के योग बन रहे हैं। 
मिथुन- मिथुन राशि के लोगों को शनि के वक्री होने पर थोडा फर्क अवश्य पड़ेगा। शनिवार के दिन शनि के निमित्त तेल का दान करें।
कर्क- शनि के वक्री होने पर आपका तनाव कम होगा एवं राहत महसूस करेंगे। छोटे-बड़े कार्यों में आ रही परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें।
सिंह- आपके लिए शनि का वक्री होना लाभकारी होगा। शनि के कारण समाज में आपके मान-सम्मान की भी वृद्धि होगी। किसी विशेष कार्य के होने से प्रसन्नता बनी रहेगी।
कन्या- कन्या राशि के लोगों के लिए वक्री शनि आपको कोई खास प्रभाव नहीं दिखाएगा तो इसमें कुछ परेशानियां होने की संभावनाएं हैं। शनिदेव के निमित्त पूजन करें।
तुला- इस राशि में अभी शनि स्थित है और वक्री होने पर भी तुला राशि में ही रहेगा। अच्छे से चल रहे कार्यों में भी व्यवधान उत्पन्न होंगे। नए निवेश से बचने का प्रयास करें एवं यह स्वास्थ्य सुधारने की ओर ध्यान दें।
वृश्चिक- जिन लोगों की राशि है वृश्चिक है वे लोग वक्री शनि से सहयोग प्राप्त करेंगे। शनि के कारण इनके कार्यों में आ रही परेशानियां दूर हो जाएंगी। कार्यों की बाधाएं दूर होने से धन लाभ होगा। 
धनु- धनु राशि के लोगों पर वक्री शनि का प्रभाव अधिक नहीं रहेगा। इन लोगों का जीवन पहले की ही तरह चलता रहेगा। शनि के वक्री होने से धन की आवक भी समान रहेगी। 
मकर- मकर राशि के स्वामी हैं शनिदेव। अत: शनि का वक्री होना भी आपके लिए लाभदायक होगा। जो लोग व्यवसाय करते हैं सुख-समृद्धि बनी रहेगी।
कुंभ- 25 फरवरी से शनि के वक्री होने के बाद आपको कुछ चिंता का सामना करना पड़ता है। किसी भी प्रकार के विवादों से बचें।
मीन- मीन राशि के लिए वक्री शनि शनि राहत प्रदान करेगा। पिछले समय से चल रही समस्याओं का अंत होगा। नए लाभ के अवसर आएंगे। जो लोग उद्योग संचालित करते हैं 
- कम से कम 9 शनिवार गरीबों को भोजन कराएं, भोजन में शनिदेव के प्रिय भोज्य सामग्री रखें।
- प्रति शनिवार शनि के निमित्त व्रत-उपवास करें।
- प्रति शनिवार शनि देव के लिए विशेष पूजा-अर्चना अवश्य कराएं।
- शुभ मुहूर्त देखकर शनि कवच धारण करें।
- सात मुखी रुद्राक्ष धारण करें।
- प्रति शनिवार आपके खाने तिल से बनी सामग्री अवश्य खाएं।
शनि मंत्र व स्तोत्र सर्वबाधा निवारक वैदिक गायत्री मंत्र 'ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो शनि: प्रचोदयात्।' प्रतिदिन श्रध्दानुसार शनि गायत्री का जाप करने से घर में सदैव मंगलमय वातावरण बना रहता है। वैदिक शनि मंत्र ॐ शन्नोदेवीरमिष्टय आपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्रवन्तुन:। शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे पवित्र और अनुकूल मंत्र है इसकी दो माला सुबह शाम करने से शनिदेव की भक्ति व प्रीति मिलती है।
प० राजेश कुमार शर्मा भृगु ज्योतिष अनुसन्धान एवं शिक्षा केन्द्र सदर गजं बाजार मेरठ कैन्ट 09359109683